Jay Ambe

ज्ञान के सूत्र

(१) दुसरे पर अंगुली उठानेवाला आदमी आज़ाद नहीं हो सकता ।

(२ ) तुम्हारे व्यक्तित्व का गवाह तुम्हारी वाणी है ।

(३) खुद को सुननेवाला आदमी सच्चा जीवन पता है ।

(४) तुम्हारी मंजिल चुने हुए सही रस्तेपर निर्भर है ।

(५) क्षमा संत पुरुष का भूषण है । करुणा स्वभाव है ।

(६) दुसरो के दू:ख पर उत्सव माननेवाला आदमी भक्त नहीं हो सकता ।

(७) स्वीकृति पूर्णता की निशानी है ।

(८) मन की बीमारी का इलाज केवल सत्संग है ।

(९) प्रेम और घृणा दोनों एक साथ नहीं रह सकते ।

(१०) नफ़रत की आग प्रेम के पानी से बूजाई जा सकती है ।

(११) विजयी होना सरल है । हारना मुस्किल है । हारा हुआ आदमी विजयी होता है ।

(१२) खोजनेवाला आदमी भटक जाता है । खुद में खोना परम सन्ति का धाम है ।

(१३) अशांति की भ्रांति मिटाना शांति का उपाय है ।

(१४) अपनी मुर्खता का ज्ञान ही सच्ची सर्वज्ञता की निशानी है ।

(१५) जिसकी दृष्टी में प्रेम है,वह सदा निरोगी है ।

(१६) इष्ट में दोष देखनेवाला और इष्ट की निंदा सुननेवाला आदमी समर्पित नहीं हो सकता ।

(१७) मीठा खाने वाली जिह्वा मीठा बोलने से मधुर लगती है। मधुर वाणी श्रेष्ठ भूषण है ।

(१८) बिना संतोष विश्राम नहि । संतोष धन अनमोल, "पूरण" तृष्णा अभागिनी हरी से न हुआ मेल ।।

माय चेलेन्ज

=>> प्रिय आत्मन तुम भीतर से खाली होकर हमारे सामने बैठकर हमार शब्द में लक्ष्य लेने से तुम तुम्हारे सही मुकाम पर पहुच सकते है। ऐ हमारा पक्का वादा है। युक्ति सहित हम तुम्हे तुम्हारे अंतिम लक्ष्य तक पहुचाएंगे। हम तुम्हे ऐसी जगह खड़ा कर देंगे की सवाल बचेगा ही नहीं। सवाल क्यों होता है? समाधान क्या है ? उस रहस्य को पाना है। सारी समस्या की जड़े हम उखाड़ के फेक देंगे। संशय मुक्त होना ही सही जीवन जानो? हम कोई पंथ संप्रदाय की बात नहीं करेंगे। व्यक्ति विशेष धर्म की सीमा से आपको ऊपर उठना है।मै इसाई,मुस्लिम,बौध,हिन्दू ,जैन धर्म की बात नहीं करेंगे। तुम्हारा धर्म क्या है ? जिस धर्म तुम्हारा रक्षक हो। जाय उस धर्म की हम बात करते है। कुछ करना नहीं है। कुछ पाना नहीं है सिर्फ अपने को जानो सम्पक ज्ञान धर्म पंथ सम्प्रदाय की सीमा से बाहर जानो। ज्ञान पवित्र और स्वतंत्र है। आप स्वभाव से स्वतंत्र है। और रहेंगे। फिर भी धर्माचार्यो ने आपके सरपे कर्म का भारी बोज रख दिया है। आप उठाने पायेंगे। आपको निर्बल बना दिया है। तुम्हारी पंखे मरोड़ दी है आप अनंत की यात्रा कैसे कर पायेंगे। आपको निर्मल बना दिया है। तुम्हारी पंखे मरोड़ दी है आप अनंत की यात्रा कैसे कर पाएंगे। निर्मल मन श्रध्धा युक्त प्रेम से हमारा शरण ही तुम्हारा जीवन है। गुरु परंपरा से मिला हुआ ही ज्ञान हम तुम्हे प्रदान करेंगे।ज्ञान ही गुरु जानो। हम अगम्य अगोचर मन वाणी का विषय नहीं है। उस ज्ञान की चरमसीमा तक पहुचाएंगे। सारे पिंड ब्रह्मांड और तुम्हारी बुध्धि सिमित  है। हमारी प्रज्ञा असीम और अमाप जानो। ऐ हमारा अहंकार है। ऐसा मत समजो ऐ हमारे भीतर की असली आवाज जानो। ऐ आवाज अगर आपके हदय में उत्तर जाय तब तुम्हे हमारे पर श्रध्धा और विश्वास करेंगे। इसमें कोई शक नहीं है। हम तुम्हे मिटाके ही रहेंगे मिटाना हमारा पैसा है। तुम हमारे पास आओ फिर वापस लौटना असंभव जैसे पानी के ग्लास में तुम सक्कर डालेंगे। एक घंटे बाद निकालना मुश्किल हो जाएगा क्योकि शक्कर पानी के साथ गुलमिल गई ऐसे तुम्हारी चेतना जब व्यापक हो जाय तब तुम कहा हो ? कहा तक हो ? वो सारे सवाल गिर जायेंगे। मौन भाषा तुम्हारी मंजिल हो जायेगी। चुप्पिमें अस्तित्व का राज पा शकेंगे।